Best Motivational Stories
Best Motivational Stories 

हेलो दोस्तों स्वागत है आपका Student-motivation.com दोस्तों! जैसे की आप सभी को पता है पक्का इरादा अर्थात् जब हम मन में किसी चीज को पाने का पक्का इरादा या युं कहे की अपना एक निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने की दर्ढ शक्ति हो तो स्वत ही हम उसको प्राप्त करते हैं पर इसके लिए हमें कठोर परिश्रम करना पड़ता है अब मे आपको एसी ही एक लड़की की कहानी बताती हूं जो बचपन से ही पैरों से दिव्यांग थी लेकिन उसके नेक इरादों ने उसे आसमान छुआ दिया तो कहानी इस प्रकार है।👉👇
सभी बच्चों में वह एक दिव्यांग लड़की थी। जब वह स्कूल में थी तो उसके एक शिक्षक उस पर व्यंग्य करते थे और बच्चे उस लड़की पर खिल खिलाकर हँस उठते 😂। एक बार उसके शिक्षक उस पर व्यंग्य करते हुए बोले"क्यो" खेल और खिलाड़ियों के बारे में जानना चाहती हो? पहले अपने पैरों की ओर तो  देखो! तुम तो ठीक तरह से चल भी नहीं सकती और ओलंपिक खेलों के रिकार्ड जानना चाहती हो? वास्तविक रुप में वह लड़की अपंग थी। बेचारी  कुछ बोल न सकी और सारी कक्षा हँसी से गूँजती रही अगले दिन कक्षा में मास्टर जी ने फिर लड़की पर व्यंग्य किया। पर इस बार वह चुप न रही और तिलमिला उठी उसने अपने बगल में पडी बैसाखी उठाई और उठते हुए आत्म विश्वास से भरे शब्दों में कहा "ठीक है आज मैं अपाहिज हूं चल फिर नहीं सकती लेकिन मास्टर जी" याद रखिए कि मन में यदि पक्का इरादा हो तो क्या नहीं हो सकता यही अपंग लड़की एक दिन हवा में उडकर दिखाएंगी। 
और जैसे ही उसने कहना बंद किया उसके साथियों ने फिर उसकी खिल्ली उड़ाई
उस दिन के बाद उस लड़की ने पीछे मुड़कर नहीं देखा वह प्रतिदिन चलने का अभ्यास करने लगी 🏃उसकी मेहनत रंग लाई और वह कुछ ही दिनों में वह अच्छी तरह  चलने और धीरे धीरे दौड़ने लगी। इस कामयाबी ने उसके हौसले बुलंद कर दिए तथा सन् 1960 के ओलंपिक में उसने भाग लिया और एक साथ तीन🥇🥇🥇 स्वर्ण पदक जीतकर सबको चौंका दिया। वह लड़की और कोई नहीं बल्कि विल्मा गोल्डीन थी।
 विल्मा गोल्डीन के दृढ शक्ति ने उसे इतनी बड़ी कामयाबी तक पहुंचाया यदि उस दिन जिस दिन उस पर व्यंग्य किया गया अगर वह उस दिन चुप 🤐🤐 रहती तो शायद वह 1960 में तीन स्वर्ण पदक न जीत पाती। 
दुनिया में अधिकतर लोगों का काम है कि वह दूसरों पर व्यंग्य करते रहे पर हमारे पास दृढ शक्ति होनी चाहिए कि हम उस व्यंग्य को अपनी शक्ति बनाए क्योंकि ये  लोग 👤👥 दो ही काम कर सकते हैं पहला हमें हमारी सफलता की line से पीछे खीचना  और हमारी आलोचना करना। इस इन लोगों के कारण अपने लक्ष्य से भटको मत और कठोर परिश्रम करो। वैसे भी किसी ने क्या  खूब लिखा है। -
         "उस छत की उँचाई को मत
        छुओ जो चंद लोगो के उपर
          है। छुना है तो उस आसमान 
       की उँचाई को छुओ जो 
                         सम्पूर्ण विश्व के ऊपर है"।             
      🌺🌼🌺🌺🌺🌼🌺
   


🌹..   Best motivational story - 2️⃣

  हांँ तो दोस्तो दूसरी कहानी एक महान व्यक्ति के जीवन से संबंधित हैं जिन्हें हम सभी जानते हैं। और इनका नाम है धीरूभाई अंबानी।
धीरूभाई अंबानी का जन्म 28 Dec 1932 में गुजरात के चोरवाडा  में हुआ था। हाई स्कूल में ही उन्होंने अपनी📖 पढाई छोड दी  और और पकौड़े बैचना शुरू कर दिया।
धीरूभाई का हमेशा से मानना था कि 💸पैसो से 📖 पढाई का कोई संबंध नहीं है ये जरुरी नहीं है कि दुनिया में पढा लिखा इन्सान ही पैसा कमा सकता है कुछ सालों तक वेे घूम घूम कर पकोडे बेचने के बाद सन 1948 में 16 साल की उम्र में वे अपने भाई रमडी लाल की सहायता से अपने एक दोस्त के साथ 🛩️यमन के एडीन्स पर काम करने चले गए एडीयन पहुंचकर पहले उन्होंने पेट्रोल पंप पर काम किया फिर कुछ दिनों बाद उसी कम्पनी में क्लर्क  की पोस्ट पर 300 रुपये प्रति माह के वेतन पर काम करने लगे।
वे अपने दिन भर के काम के बाद भी कोई न कोई काम करते रहते थे जिसे उनके साथियों में उनके पास सबसे ज्यादा पैसा था। फिर भी वे 🤔सोचते थे कि यदि उन्हें अमीर बनना है तो उन्हें अपना business करना ही होगा और business के लिए पैसे तो चाहिए ही होगे। 
कई जगह पर काम करने के बावजूद उन्होंने अपने काम में कोई भी कमी नहीं की और पूरी मेहनत और दायित्व से अपने कार्य को लगन से किया इसलिए काम से खुश होकर 😊कम्पनी के मालिक ने उनका प्रमोशन के पद पर कर दिया लेकिन थोड़े दिन कम्पनी में काम करने के बाद उन्होंने काम छोड़ दिया और अपने देश 🇮🇳भारत लौट आए 1955 में उन्होंने 15000 रुपये लगाकर उन्होंने अपने चचेरे भाई के साथ मिलकर मसालों के निर्यात और पोलिस्टर के धागे के आयात का निर्यात किया उनके कठिन परिश्रम के दम पर कुछ सालों में कम्पनी का turnover 10,00,000 सालाना हो गया उस समय पोलिस्टर से बने कपड़े भारत में नए थे। और यह सूती के मुकाबले ज्यादा पसंद किए जाते थे क्योंकि ये सस्ता और टिकाऊ था इसमें होने के कारण पुराने होने के बाद भी यह नऐ जैसा दिखाई देता था और लोगों द्वारा पसंद किए जाने के वजह से जल्द ही उनका मुनाफा कई गुना बढ़ गया।
कुछ वर्षों बाद धीरूभाई अंबानी और चम्पक लाल दमानी व्यवसाय साझेदारी समाप्त हो गई क्योंकि दोनों के स्वभाव व्यापार करने के तरीके बिल्कुल अलग थे लेकिन धीरूभाई अंबानी ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा देखते ही देखते उन्होंने समय के साथ चलते Telecom, Energy, Electricity and Petroleum जैसे व्यापार में कदम रखते गए।
आज धीरूभाई अंबानी की कंपनी में 90,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं और भारत में उनकी कंपनी Top पर है। 6july2002 को धीरूभाई अंबानी ने दुनिया से विदा 😢😭 ले लिया।
उनका कहना है -
   जो सपने देखने की हिम्मत
     करते हैं। वो पूरी दुनिया को
   जीत सकते हैं। 
 अर्थात दोस्तों जो सपने हम देख सकते हैं उन्हें पूरा भी कर सकते हैं उसके लिए चाहिए मन में कुछ करने की लालसा।
    

🌹..   Best motivational story


एक आदमी था जिसके चार बेटे थे। वह चाहता था कि उनके बेटे भी चीजों को जल्दीबाजी समझें। इसलिए उसने उन्हें एक खोज पर भेजा, बदले में, जाने के लिए और एक नाशपाती के पेड़ को देखो जो एक महान दूरी पर था। पहला बेटा सर्दियों में गया, दूसरा वसंत में, तीसरा गर्मियों में और सबसे छोटा बेटा पतझड़ में।

  जब वे सभी चले गए थे और वापस आए थे, तो उन्होंने उन्हें यह बताने के लिए एक साथ बुलाया कि उन्होंने क्या देखा था। पहले बेटे ने कहा कि पेड़ बदसूरत, मुड़ा हुआ और मुड़ा हुआ था। दूसरे बेटे ने कहा, "नहीं, यह कलियों और वादे से भरा हुआ था"। तीसरा बेटा असहमत था; उन्होंने कहा कि यह खिलने से लदी थी जो इतनी प्यारी थी और इतनी सुंदर लग रही थी, यह सबसे सुंदर चीज थी जिसे उन्होंने कभी देखा था। आखिरी बेटा उन सभी से असहमत था; उन्होंने कहा कि यह पका हुआ था और फल के साथ गिर रहा था, जीवन और तृप्ति से भरा था। उस आदमी ने फिर अपने बेटों को समझाया कि वे बिलकुल ठीक हैं, क्योंकि उन्होंने पेड़ के जीवन में केवल एक ही मौसम देखा था। उसने उन्हें बताया कि वे केवल एक मौसम के द्वारा, या किसी व्यक्ति को एक पेड़ का न्याय नहीं कर सकते हैं, और यह कि वे कौन हैं और उस जीवन से प्राप्त होने वाले आनंद, आनंद और प्रेम को केवल अंत में मापा जा सकता है, जब सभी मौसम ऊपर हैं।

🌹.. Best moral story               in english.
There was a man who had four sons. He wanted his sons to learn not to judge things too quickly. So he sent them each on a quest, in turn, to go and look at a🌳 pear tree that was at a great distance. The first son went in the winter, the second in the spring, the third in summer and the youngest son in fall.  When they had all gone and come back, he called them together to describe what they had seen. The first son said that the 🌳tree was ugly and bent and twisted. The second son said, "No, it was covered with green buds and full of promise". The third son disagreed; he said it was laden with blossoms that smelled so sweet and looked so beautiful, it was the most graceful thing he had ever seen. The last son disagreed with all of them; he said it was ripe and drooping with fruit, full of life and fulfilment. The man then explained to his sons that they were all right, because they had each seen but only one season in the tree's life. He told them that they could not judge a tree, or a person, by only one season, and that the essence of who they are and the pleasure, joy and love that come from that life can only be measured at the end, when all the seasons are up. 

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