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"बुनियादी शिक्षा इतिहास के पन्नों पर"

शिक्षा जिसे  एक शब्द में व्यकत किया जाए तो शायद उचित नहीं होगा। यह एक वृक्ष के समान है। इसी वृक्ष की एक शाखा है बुनियादी शिक्षा - अर्थात् शिक्षा में गुणवत्ता होना। जिसकी वर्तमान समय में आवश्यकता इतनी हैं जितनी की  मकान बनाने के लिए आधार की जरूरत होती हैं ।
        शिक्षा में गुणवत्ता होना कितना आवश्यक है इस बात का पता इस से लगाया जा सकता है कि U.N. द्वारा वर्ष 2015 में जारित 17 "सतत पोषणीय विकास लक्ष्य" ( sustainable development goals ) में 4 वां लक्ष्य "शिक्षा में गुणवत्ता"(Quality education) है। यहां यह बात ध्यान देने योग्य है कि यह केवल शिक्षा प्राप्त करना ही नहीं बल्कि इस प्रकार की  शिक्षा प्राप्त करना जिसमें  गुणवत्ता हो है। जिसे भविष्य में प्रयोग में लाया जा सके।
          वास्तव में देखा जाए तो आज शिक्षा का तात्पर्य केवल डिग्री धारण करना, अच्छे नंबर लाना,तक ही सीमित है। क्यों कि आज हम पढ़ तो लेते हैं लेकिन उसका प्रयोग सही जगह पर करना ये नहीं सीख पाते हैं।  इस बात का पता इस बात से लगाया जा सकता है कि हम trigonomery के सारे सूत्र तो याद कर लेते हैं लेकिन उस का प्रयोग वास्तव में कहा किया जाता है यह नहीं सीख पाते हैं ।वह सूत्र बस अच्छे नंबर पाने तक ही सीमित हो जाते  हैं।
       अगर  quality education के न होने का कहीं बुरा प्रभाव पड़ रहा है तो वे  ग्रामीण क्षेत्रों में है क्योंकि कि आज भी वहा शिक्षा की व्यवस्था सुचारू रूप से हीं है। और वे आज भी शिक्षा में गुणवत्ता के महत्व को भली भांति नहीं समझ पा रहे हैं।
        अब समय आ चुका है कि  हम  इस बात पर ध्यान दें कि जो शिक्षा हम ग्रहण करे उस में गुणवत्ता हो। उसे हम प्रयोगात्मक रूप में समझने की कोशिश करे  क्यों कि प्रयोगात्मक रूप से पढे विषयो की अधिक समय तक मस्तिष्क में छवि बनी  रहती हैं। यदि आज भी हमारे शिक्षा में गुणवत्ता नहीं है तो हम वर्तमान समय में इस  शिक्षा की प्रतिस्पर्धा में कहीं पीछे रह जायेंगे।अब इस नए दशक में साक्षर होना ही हमारा लक्ष्य नहीं रहा, अपितु इस  प्रकार की शिक्षा ग्रहण करना है जिसकी गुणवत्ता  भविष्य का आधार बन सके।

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