श्रीराम से सीखिए Leadership Qualities - by Shubham Thapliyal


दोस्तों,  आप लोगों ने दुनिया के अनेक leaders की कहानियाँ और उनकी leadership के किस्से सुने होंगे। राजनीतिक हो या खेल जगत, सामाजिक मंच हो या पारिवारिक, हर जगह किसी समूह विशेष को दिशा देने के लिए एक अच्छे leader की जरूरत होती है। आप ऎसे ही एक व्यक्ति के बारे में पढ़ने जा रहे हैं जो न केवल एक आदर्श हैं बल्कि उनकी leadership quality भी अनुकरणीय  है।
         'राम' इस शब्द को पौराणिक, धार्मिक या अन्य किसी भी नज़र से सोचिए। उनका जीवन हमनें आराध्य के रूप में, मनोरंजन के रूप में या कहानी के किरदारों के रूप में पढ़ा है। उनके इसी महान जीवन यात्रा के कुछ उदाहरणों से आप true leadership को समझिये-
(1)-'राम वन गए तो बन गए '......
       आप सोचकर देखिए कि एक ऎसे परिवार से आने वाला राजकुमार जिसके पुरखे सदियों से भारत के सम्राट रहे हों,उनका राज्यभिषेक होना था लेकिन उन्हें वनवास भेजा गया। वे 14 साल तक जंगल में रहे और उन्होने लोगों के बीच रहकर, उनके कष्टों को समझकर एक एक कर उनका निवारण किया।
(2)-राम को अयोध्या से जाते हुए सरयू नदी पार करनी थी, क्या उस समय के चक्रवर्ती सम्राट दशरथ के पास एक नाव नहीं रही होगी जो उन्हें नदी पार करवा दे। लेकिन नहीं राम ने एक साधारण से गरीब नाविक 'केवट' का सहारा लिया जो वंचित था, शोषित था।
            " सीख - राजा होना यह नहीं होता कि वह बड़े बड़े जहाजों और ऐश आराम के साथ रहकर हुकूमत करे। राजा (या leader) वो होता है जो अपनी प्रजा (या team) के साथ रहकर उनके बीच जाकर समस्या का हल निकाले और उनका भला करे."
3-राम को विश्व के सबसे शक्तिशाली राजा "रावण" को हराना था। वे चाहते तो राजाओं की सहायता भी ले सकते थे। रामायण के अनुसार कौशल प्रदेश उनका ननिहाल था जो पंचवटी के पास पड़ता है। वे चाहते तो उनकी सेना लेकर लंका की ओर कूच कर सकते थे। लेकिन नहीं, उन्होने सहायता ली, शोषित, वंचित और पिछड़े समाज में गिने जाने वाले लोगों की,, जो रामायण के अनुसार बंदर, भालू आदि थे। यहाँ यह बात सीखने लायक है कि -
"A TRUE LEADER IS NOT HE, WHO MAKES A PERFECT TEAM BUT THE TRUE LEADERSHIP LIES IN MAKING A TEAM PERFECT AND WORTH".

     राम ने अपने सबसे पिछड़े क्षेत्र के लोगों को भरोसा दिलाया जो उनको एक अच्छा leader बनाता है। 

(4)-इसी से मिलता जुलता एक उदाहरण यह भी है कि राम बाली और सुग्रीव में से सुग्रीव को चुनते हैं। सुग्रीव बाली से ताकत में भी कम था और रामायण तो यह भी कहती है कि बाली इतना शक्तिशाली था कि उसने रावण को भी कई बार युद्ध में हराया था। लेकिन राम ने फिर भी सुग्रीव को चुना क्योंकि वो अन्याय का सताया हुआ और अपने ही देश से बाहर निकाला हुआ आदमी था. यह राम की अद्भुत नेतृत्व क्षमता ही थी कि उन्होंने सुग्रीव जैसे एक आत्मविश्वासहीन आदमी को शक्तिशाली बाली के सामने खड़ा करवा दिया।
राम का मोटिवेशन power ही था कि सुग्रीव अपने से कई गुना ताकतवर बाली से लड़ने को तैयार हो गया। 
सीख - एक leader के अंदर यह गुण भी बहुत महत्वपूर्ण है कि वो अपने अधीन काम करने वाले व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास जगा सके।
  ....... Post को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद..........

Comments

  1. Brother apne jo English ko mix kiya hua h na....bhot pyara tareeka h...kuki agar waha PE hindi hoti to shayad samjb nhi ata.....or leader k bare m axxi jankqri dene k liye thanks Shubham bhi....gud luck for future bde bhi.❣️❣️

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    1. Thanku bhai, आपके सुझावों का भी स्वागत है.... Suggest करते रहिये,अच्छे से अच्छी चीजें आप तक पहुंचाने की कोशिश करता रहूंगा,,❣️❣️

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